प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने तलाक के 30 दिन बाद दूसरी शादी करने वाली महिला को मासिक भरण-पोषण दिए जाने के फैमिली कोर्ट के आदेश पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि दूसरी शादी के बाद पत्नी भरण-पोषण की हकदार नहीं रहती। मामले में हाई कोर्ट ने झांसी के अपर प्रधान न्यायाधीश, फैमिली कोर्ट से स्पष्टीकरण तलब किया है कि दूसरी शादी की जानकारी होने के बावजूद भरण-पोषण का आदेश किस आधार पर पारित किया गया।
फैमिली कोर्ट के आदेश को दी गई चुनौती
न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि की एकलपीठ ने राजेश चतुर्वेदी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। याचिका में झांसी फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें पति को पत्नी स्वाती अगरिया को 10 हजार रुपये और नाबालिग बेटे मेदांश को 5 हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण देने का निर्देश दिया गया था।
तलाक के बाद पत्नी ने की दूसरी शादी
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि झांसी फैमिली कोर्ट ने 30 जुलाई 2025 को राजेश चतुर्वेदी और स्वाती अगरिया के बीच तलाक का फैसला सुनाया था। इसके खिलाफ राजेश ने प्रथम अपील दायर की। इस दौरान पत्नी की ओर से दाखिल प्रति शपथपत्र में यह जानकारी दी गई कि उसने तलाक के आदेश के 30 दिन बाद, 3 सितंबर 2025 को दूसरी शादी कर ली थी। अदालत के 19 सितंबर 2025 के आदेश में भी इस तथ्य का उल्लेख किया गया था।
हाई कोर्ट ने उठाया आदेश पर सवाल
हाई कोर्ट ने कहा कि जब दूसरी शादी का तथ्य अदालत के संज्ञान में था, तब भी पत्नी के पक्ष में भरण-पोषण का आदेश पारित किया जाना उचित नहीं प्रतीत होता। इसी आधार पर अदालत ने झांसी फैमिली कोर्ट से इस संबंध में जवाब मांगा है।
बेटे के भरण-पोषण पर नहीं जताई आपत्ति
याचिकाकर्ता ने अदालत में कहा कि उसे अपने नाबालिग बेटे मेदांश के लिए निर्धारित 5 हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण देने पर कोई आपत्ति नहीं है और वह इसका भुगतान करने के लिए तैयार है।
दो सप्ताह में मांगा जवाब, 21 जुलाई को अगली सुनवाई
हाई कोर्ट ने पत्नी को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह के भीतर प्रति शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है। साथ ही रजिस्ट्रार और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, झांसी को आदेश की प्रति भेजकर अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
